कल की हस्ती खेलती आज आंसुओं में डूब गई

आज एक शब्द बोलने पर भी वो सिसक गई

खुद को मार दे या लड़ ले वो समाज से

मन का दुख बताए तो रोक न पाए खुद से !!


लाख मिन्नतें सुनकर भी रुके ना कातिल वो

चीर कर ले गए उसके हर एक अश्रु को

इंसानियत की सारी हदें कर दी पार

जानवरों सा साथ कर गए व्यवहार !!


नौ महीने रख कोख में, जिसको इतना प्यार दिया

किसी और ने ही मेरी बेटी को मुझसे छीन लिया

राखी में रक्षा करने का वादा दिया जिसको

इस बार वो भाई भी ना बचा सका बहन को !!


रास्ते पर फेंक वो तो चले गए

पर किसी की दुनिया ही रास्ते पर ला गए

एहसास भी नहीं उनको क्या वह कर गए

जैसे किसान का पूरा खेत ही उजाड़ गए !!


शरीर में जख्म, आंखों में पानी

बिस्तर पर लेटी रह गई गुड़िया रानी

पापियों की बस्तियों से चली गई दूर

लड़की थी वह, क्या यही था उसका कसूर ??