हर दिन दुआ में संतान मांगी

आखिर मेरी भी पुकार उसने सुनी

झोली भर दी मेरी और पूरी कर दी मुराद

'लड़का हुआ है'- यह आवाज मैंने सुनी !!


सीने से लगाकर उसकी धड़कन सुनी

वह एहसास की थी अलग कहानी

कोमल सा शरीर, फूल सा प्यारा

आखिरकार मेरी मां भी नानी बनी !!


प्यार इतना दिया कि ना रही कोई कमी

देखते-देखते बड़ा हो गया बेटा मेरा- 'शनि'

चलना सीखा और फिर दौड़ने भी लगा

उसके आगे अब किसी की ना चली !!


'प्यार क्या होता है'- अब मैं जानने लगी

उसकी एक चोट पर, मैं सिसकने लगी

तकलीफ ना हो उसे थोड़ी सी भी

उसे खुद से ज्यादा प्यार मैं करने लगी !!


नया बचपन उसके साथ, मैं जीने लगी

कभी हाथी तो कभी घोड़ा, मैं बनने लगी

दिन कब ढल जाता, पता ही नहीं चलता

बेटे की आवाज पूरे घर में गूंजने लगी !!


साल पे साल बीते और दुनिया बदलने लगी

अब तक जो छोटा था उसकी अब नौकरी लगी

मेरी भी हड्डियां अब कमजोर हो गई

घर में बहू की जरूरत होने लगी !!


बेटे के लिए अब लड़की देखने लगी

सुशील मिली और रिश्ते की बात चलने लगी

आखिरकार इनकी भी शादी हो गई

अब परिवार में खुशियां और बढ़ने लगी !!


एक दिन छोटी बात पर कहा-सुनी होने लगी

बहू अलग होने की बात करने लगी

दिल फटा मेरा यह देखकर कि

मेरे शनि को यह बात बुरी नहीं लगी !!


जाने की तैयारी सब होने लगी

मैं गई और बहू से माफी मांगने लगी

नहीं बोलूंगी कुछ, ना करूंगी

पर ना उसने, ना बेटे ने मेरी सुनी !!


रो पड़ी मैं और रोकने की कोशिश करने लगी

बुढ़ापे के सहारे को दूर जाते देखने लगी

अकेली हो गई मैं और समझ भी गई कि

मां की आदत सबको बस बचपन के लिए ही लगी !!