
घर देखे कितने साल हो गए
आधे काले बाल भी अब पूरे सफेद हो गए,
ले चल बेटा मुझे यहां से
पोते को खिलाए जाने कितने जनम हो गए !
मन नहीं लगता इस वृद्धाश्रम में
ना कहूंगा कुछ, ना करूंगा
तेरे आज्ञा के बगैर सांस भी ना लूंगा
सब कुछ तेरे नाम करवा कर
बस घर से ही अंतिम विदाई लूंगा !
मन करता है, तुझे छू लूँ
देख लूँ एक बार आहें भर लूँ
ना रख दूर इतना मुझे
बुढ़ापे का सहारा समझा था तुझे !
भूख प्यास ना रही अब
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