ढ़ाई लीटर प्यार

वो दिन सावन का एक आम सा दिन था । हम अपनी किसी बेहद ख़ास से मिलके आ रहे थे । मिलके आ रहे थे बड़ा पारिवारिक सा लगता है वरना तो बहुत कुछ करके आ रहे थे । खैर घर लौटेते ही अम्मी बोली : " बेटा प्यार वाले डिबबे में प्यार ही ख़तम हो गया , जा जाके चौराहे वाले पम्प से ढ़ाई लीटर प्यार ले आ जाके । " हमने कहा " जी अम्मी !" अम्मी फिर रोक के बोली : " पम्प पे मुफ़्त में पारिवारिक हवा भी पड़ती हैवो ज़रूर पड़वा लेना अपने अंदर । " हमने फिर से कहा :" बिलकुल अम्मी और भाग लिए उससे पहले अम्मी कुछ और कहती "। दरसअल उस दिन हमारी अपनी बोतल में कुछ प्यार अत्याधिक मात्रा में हो गया था कारण वही कोई ख़ास जो थी । पम्प से लौटते वक़्त हमने अपना एक लीटर प्यार उस ढ़ाई लीटर प्यार वाली बोतल में मिला दिया ।

उस मिलावट की पोल आज खुल गई जब मुझे छोड़ सभी परिवार जनों का प्यार के कोलेस्ट्रॉल में भारी उछाल देखा गया पर मेरी रिपोर्ट बिलकुल नार्मल निकली । हमारे प्यार के मीटर को तो कोई बड़े ध्यान से संभाले था और हमारा वो प्यार लेकर उस मात्रा को बरकरार किये थे । आज उस मिलावट और उस गोपनीय व्यक्ति का भांडा फूट गया । ये ढ़ाई लीटर प्यार तो हमें उस ढ़ाई किलो हाथ से भी महंगा पड़ गया ।

- पुलकित