नहीं

मिलता है जो उससे दिल नहीं भरता

भरता है दिल जिससे वो हाथ नहीं लगता 

मेरे रास्तों को उसका अंजाम नहीं दिखता

अंजामों को मेरे रास्तों का स्वाद नहीं मिलता


दिखता है जो अक़्सर वो सच नहीं निकलता

मेरा सच अब मुझसे ही नहीं आ मिलता

खुद से कहा झूठ ऐसे नहीं साथ छोड़ता

एक झूठ दूजे झूठ को बिलकुल नहीं रोकता


कई ज़ख्मों से ये रक्त निकलना नहीं थमता

फिर भी उनका दर्द क्यों नहीं पता चलता ?

कई ठोकरों का ऐसे निशान नहीं मिलता

फिर भी उनका दर्द आसानी से कम नहीं पड़ता


इस दिल को ऐसे नहीं है प्यार होता

जिससे आखिर में होता , उसके बगैर काम नहीं चलता

अपनी साँसें ऐसे नहीं किसी के नाम होतीं

कभी जो हो जाती तो बेवज़ह नहीं होतीं


शाम बिना कोई रात नहीं आती

हर एक श्याम के लिए एक राधा नहीं आती

हर पार्थ को उसका माधव नहीं मिलता

हर दूसरा द्वंद ऐसे महाभारत नहीं कहलाता


कई सवालों का आज भी हल नहीं मिलता

फिर भी जवाबों की तलाश का सफ़र नहीं थमता

रुकावटों का सिलसिला ऐसे नहीं रुकता

फिर भी हमारे इरादों का रुख ऐसे नहीं पलटता............


- पुलकित