माना
इधर-उधर है कुछ भी न पाना
जबसे हमने तुझको अपना है माना
आ तुझसे उन हवाओं सा टकरा जाना
और फिर तेरा हर बहाना है माना
एक अरमान सजाया है मैंने जाना- माना
जिसमें सिर्फ तेरा ही है आना-जाना
अब तेरी हर करवटें है गिनते जाना
तेरी साँसों को इस दिल ने अपना है माना
बस तेरे लिए एक गाना है बुनना
तुझे तो अपनी ज़िंदगी की धुन है माना
शब्दों को चुन चुन है अब लाना
तेरी हर शर्तों को हमने है माना
अपने दिल के टुकड़े समेटते है जाना
उनको जोड़ शीशे में तुझे ही अब पाना
थोड़ा सब्र अभी है मुझको और है लाना
उस कब्र तक जाते तुझको अपना है माना ।
- पुलकित
