खाली-खाली
मैं अक्सर रहता हूँ खाली खाली
पहने वो क़मीज काली-पीली
जो तू भी हो जाए खाली
अंदर मचे एक अलग ही ख़लबली
जो तू अकेले निकल जाए बाली
हम महसूस करें बड़ा खाली खाली
तू ही बन जाना मेरी घरवली
क्योंकि मुझे लगे हाथ मिले एक साली
हम बन जाएँ तेरी टोपी जाड़े वाली
तू बस हो जाना मेरी हमेशा वाली साथी
हम बन जाएँ तेरी छतरी बारिश वाली
तो बस हमें खोल लेना वरना हो जाऊं खाली खाली
मैं तेरा एक कवि बड़ा ही खाली खाली
और तू मेरी वो पंक्तियाँ भारी वाली........
- पुलकित


