झरना

 

झरना


मैं उस झरने को देखता रहा 

जिसमें संसार का सार दिख जाए ,

उसने उस झरने को देखा

जिसमें दुनिया का सारा तनाव था ,

मैं उस झरने को देखता रहा

जिसमें बहने का सारा मौज़ था,

उसने उस झरने को देखा

जिसमें उस उछल के गिरना लिखा था ,

मैं उस झरने को देखता रहा

जो उस अकेले पत्ते का पवित्र कर जाए ,

उसने उस झरने को देखा

जिसके बल से वो चटटान भी टूट जाए ,

मैं उस झरने को देखता रहा

जिसके नीचे हम आनंदित होते रहे ,

उसने उस झरने को देखा

जिसमें भटका मुसाफ़िर बहता चला जाए

अंत में हम दोनों  ने  कुछ साथ देखा

जब झरना उस ताल में आ मिल जाए ।


- पुलकित,