चल चले
चल चले हम एक सैर करने
खुद से करे वादों पे गौर करने
चल चले हम किसी से तो इश्क़ करने
निकल पड़े हम उसकी कहीं तो तलाश करने
चल चले हम उसी से बेमतलब की बातें करने
बीते कल के ख़यालों को आज सच करने
चल चले हम इक साझेदारी करने
थोड़ी उसकी ,थोड़ी अपनी मनमानी करने
चल चले हम अपनी गफ़लत कम करने
उसी से दोबारा बढ़- चढ़ उल्फ़त करने
चल चले हम साथ आ अपनी बेफिक्री करने
थोड़ा खुद को, थोड़ा उसको परेशान करने
चल चले हम उसकी हाँ में हाँ करने
बिन बताए उसको , थोड़ी अपने मन की करने
चल चले हम फिर शब्दों से दो- दो हाथ करने
कही जा चुकी बातों को अपने अंदाज़ में बयान करन............
- पुलकित


