हर ओर आग धधक रही

मत सोच फरिश्ते क्या होगा !

हर शाख पे उल्लू बैठा है

अंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा?

सभ्य असभ्य हो गए

अब हाय सभ्यता क्या होगा !!

जब दिल के बाग सेहरा हुए

मिल जाए कहकशां क्या होगा??