Poetry 1 min read 783.8K reads

दो टूक


हर ओर आग धधक रहीमत सोच फरिश्ते क्या होगा !

हर शाख पे उल्लू बैठा हैअंजाम ए गुलिस्तां क्या होगा?

सभ्य असभ्य हो गएअब हाय सभ्यता क्या होगा !!

जब दिल के बाग सेहरा हुएमिल जाए कहकशां क्या होगा??

Read more Earn more Learn more