थक सकते हैं पांव तुम्हारे

पड़ सकते हैं इनमें छाले,

करके मन में शपथ

पार करना यह अग्निपथ,

बाधाओं के आगे कभी झुकना नहीं

मंजिल मिलने तक रुकना नहीं ।।