हूॅं मैं एक शरीर,तू मेरा साया है ।जिस भी डगर गई,वहां तुझे पाया है ।इस कदर इश्क़ को तेरेखुद में मैंने बसाया है,बन गई हूॅं वो मृगजिसमें कस्तूरी सा तू समाया है ।।
हूॅं मैं एक शरीर,तू मेरा साया है ।
जिस भी डगर गई,वहां तुझे पाया है ।
इस कदर इश्क़ को तेरेखुद में मैंने बसाया है,
बन गई हूॅं वो मृगजिसमें कस्तूरी सा तू समाया है ।।