मिटाई फिर तूने हवस
किया मेरा शिकार,
दफन कर इंसानियत
लिया हैवानियत आकार,
बार-बार का यह दुष्कर्म तेरा
है जननी का तिरस्कार,
अब भी निर्दोष बने रहना तेरा
नहीं है समाज को स्वीकार ।।


मिटाई फिर तूने हवस
किया मेरा शिकार,
दफन कर इंसानियत
लिया हैवानियत आकार,
बार-बार का यह दुष्कर्म तेरा
है जननी का तिरस्कार,
अब भी निर्दोष बने रहना तेरा
नहीं है समाज को स्वीकार ।।