नहीं सीखा जीने का सलीका
स्कूलों के हिसाब से ।
पढ़ रहा हूं जिंदगी को,
खेतों की किताब से ।
अन्न देने वाला मैं इंसान हूं,
जनमा मैं एक किसान हूं ।।


नहीं सीखा जीने का सलीका
स्कूलों के हिसाब से ।
पढ़ रहा हूं जिंदगी को,
खेतों की किताब से ।
अन्न देने वाला मैं इंसान हूं,
जनमा मैं एक किसान हूं ।।