अमीरों का प्रतिपक्षी

और पैसों की कमी

केवल इतना ही नहीं,

वो जो कृष्ण ने अश्वत्थामा को दिया

वही शाप है गरीबी ।।


दुःख, पीड़ा और कष्टों से

भरी है जिसकी झोली,

पीप निकलते उस घाव सा

है असहनीय, किन्तु

सहने को बाध्य है गरीबी ।।


सींचकर अपने पसीने से

पत्थरों और ईटों को

करके इमारतें खड़ी,

किसी किनारे फुटपाथ पर

झोपड़ियों में बस रही है गरीबी ।।


परोस कर स्वादिष्ट भोजन

किया तृप्त जिह्वा को तुम्हारी,

फिर उठाकर बचे टुकड़े

उसी थाली से तुम्हारी

आधा पेट सो रही है गरीबी ।।


ताकि चला सको अपनी कंपनियां

और करो अपनी इच्छाएं पूरी,

दे रहा उजाला तुम्हें

दिन रात वो करके मजदूरी

खुद अंधेरे में जी रही है गरीबी ।।


तन ढकने को तुम्हारे

और दिख सको तुम प्यारे,

करनी रंगीन दुनिया को तुम्हारी

सिलकर धोती, कुर्ता और साड़ी

अधनंगी कहीं घूम रही है गरीब ।।


न थके तुम्हारे पांव

न पड़ सके इसमें छाले,

इसी सुविधा के लिए तुम्हारी

बनाकर आरामदायक गाड़ी

आज पैदल चल रही है गरीबी ।।