अभी इतनी मासूम हो 

कोमल मन है अभी तुम्हारे

गंगा जैसी पवित्र हो 

तब क्यो सहमे हुए है नयन तुम्हारे

समाज के बुरी जाल में 

समाज ने ही तुझे फसाया है 

कोई भी उन दुष्टो के खिलाफ नही बोला

इस लिए उन भेड़ियों ने तुझे नोच के खाया है

सब दोष देते तुम्हारे कपड़े को

उनकी मानसिकता को कोई नही समझाता

बात समझ मे आती है 

जब विपत्ति अपने सर पे आता

बात रहती अगर छोटे कपड़ो की तो

ट्विंकल और अशिफ़ा का बचपन जिंदा होता

सुढृन रहती समाज तो दोषियों के गले मे फंदा होता

गुज़ारिश है उन सांसद के पत्थरों से 

तुम ठोस कानून क्यो नही बनाते 

तुम आते केवल लाश देखने 

और सांत्वना देके चले जाते