हर एक रोज वह ख्यालों में आता है हर एक रोज वह अपनी याद दिलाता है यह जो करुणारस है वह समझ नहीं पता है थोड़ी देर अगर भूल जाऊं पर किसी ना किसी कारण वह फिर याद आ जाता है मैं भी उसे भूलना नहीं चाहती समझिए रोज याद आकर नया पाठ पढ़ा जाता है पागल समझिए यह समझिए पागलपन अब यह पागलपन जीवन में बढ़ता जाता है हर एक रोज वह खयालोंं में याद आता है
