मेरे हिन्दुस्तान का झंडा 

बना है तीन रंगों से 

केसरिया है, हरा है और सफ़ेद 

दरमियाँ दोनों ही रंगों के 

जो लाखों लोगों की कुर्बानियों के बाद 

हमारे पास पहुंचा है 

तो इसकी कितनी अज़मत है? 

 

मगर इन चंद सालों में 

अलग रंगों में सब ही बंट गएँ हैं 

कोई झंडा हरा लेकर निकलता है 

कहीं केसरिया रंग में जेबतन होकर 

रैली निकलती है 

नहीं जो दोनों रंगों में समाते हैं 

सफेदी ओढ़कर 

वो बस अमन का ढोंग करते हैं 

 

कभी हम एक झंडे के तले  

इक रंग में रंगते थे 

मगर अब सबके अपने रंग हैं 

और अपने-अपने ढंग 

 

हमारा मुल्क है, झंडा हमारा है 

चलो फिर से सभी 

इक साथ तीनों रंग में रंग जाएँ 

रंगे तो 

फिर यही इक पक्का रंग होगा...!!