वक़्त को आते-जाते देखा है? ख़्वाब का दम घुटते देखा है? ख़्वाब मरे तो दुनियां ही कितनों की मिट जाती है, वक़्त मगर बहता रहता है वक़्त के गर्द में लिपटे चेहरे धुंधले ख़्वाब के सायें-से जिस्म, जलती रूह को बैठे-बैठे वक़्त गुज़ारते देखा है? ख़्वाब अगर ज़िन्दा हो जाये रूह को सांस आ जाती है वक़्त ठहर-सा जाता है! रूह बचानी है गर तुमको ख़्वाब का दम घुटने मत दो...!!