महफ़िल जब लगी थी...
मुझको भी बुलावा आया था...
और कैसे ना जाते हम...
उसकी कसमें दे कर जो बुलाया था...
फिर जब पढ़ने को कुछ कहा गया...
तब उनका खयाल ही आया था...
फिर अक्षर – अक्षर जोड़ कर मैंने...
दिल का दर्द सुनाया था...
तब आशू उसकी यादों के...
ना ना करते निकल गए...
जो समझ गए वो ख़ामोश रहे...
बाकी वाह वाह करते निकल गए।।।