लम्हे गुज़र जाते हैं
यादें रह जाती हैं,
कभी इन्सान मर जाता है
सांसें धीमी रह जाती हैं।
दर्द आंखों से बयां हो जाते हैं
आहें रह जाती हैं,
कभी इन्सान सामने होता है
बाहें सूनी रह जाती हैं।
मंजिलों के पते मिल जाते हैं
उमंगें रह जाती हैं,
कभी इन्सान चलता जाता है
राहें खाली रह जाती हैं।
जज़्बात दिल में दफ्न हो जाते हैं
धड़कनें रह जाती हैं,
कभी इन्सान ख़ामोश होता है
आंखें बोलती रह जाती हैं।
भीड़ में जब चले जाते हैं
आवाज़ें रह जाती हैं,
कभी इन्सान खुश होता है
तन्हाईयां रह जाती हैं।
लम्हे गुज़र जाते हैं
यादें रह जाती हैं,
कभी इन्सान मर जाता है
सांसें धीमी रह जाती हैं।


