मेरे अधिकार तो ,
छीन लिए तुमने ,
मेरे जैसा हुनर कहाँ से लाओगे ,
बोलो साहस इतना तुम भला कहाँ से पाओगे ,
दुर्योधन सा सिंहासन है मिला ,
युद्धिष्ठिर से पूजनीय तुम कैसे कहलाओगे |
हमारे अंदर ज्ञान का लौ आलोकित है ,
अंधेरो से न हम घबराएंगे |
फ़िक्र तुम अपनी करो ऐ जाने जां ,
खैरात की चांदनी में कब तक नहाओगे ;
अमावस की काली रातों में ,
तुम औंधे मुह गिर जाओगे |
मेरे अधिकार तो ,
छीन लिए तुमने ,
मेरे जैसा हुनर कहाँ से लाओगे ,