
जन्म दिया था माँ ने जीवन पाया है गुरुवर आपसे |
उसने अमृत पिलाया पुस्त बनाया ,
ज्ञान रस का पान कराया आपने |
इस जीवन का मोल चुकाया जाये कैसे ,
अमर ये ज्ञान पाया गुरुवर आपसे |
जगमगा रहा था संसार ,
सूरज की किरणों से |
पर कूप अँधेरा था कही मेरे मन में ,
चमक उठा मेरा अंतरंग भी ,
पाया जो गुरुवर ज्ञान प्रकाश आपसे |
जन्म से जं
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