
कमल की पंखुरी सी नयनों वाली ,
कहाँ से आई है तू ,
ऐसा लगता है जैसे ,
उस चाँद की परछाई है तू |
लिए गालो पर सुबह की ललाई ,
भोर में जैसी साँझ को वैसी ,
सुख में जैसी दुःख में वैसी .
मानो सारी सृष्टि की सुंदरता तुझमें समायी हो जैसी |
छवि ते
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