
आँखों से एक समंदर निकलने को है
थाम के रखा था अब वो बहने को है ।
तुम इतनी दूर गयी की तेरी खबर भी नही आती
अब हमारी यादों पर धूल जमने को है ।
लौटो तो आना कभी दिल की बगिया में
सींच देना पौधा प्यार का मुर्झाने को है ।
दिये की लौ भी अब लड़खड़ाने लग
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