आँखों से एक समंदर निकलने को है थाम के रखा था अब वो बहने को है । तुम इतनी दूर गयी की तेरी खबर भी नही आती अब हमारी यादों पर धूल जमने को है । लौटो तो आना कभी दिल की बगिया में सींच देना पौधा प्यार का मुर्झाने को है । दिये की लौ भी अब लड़खड़ाने लगी शायद ‎कोई अनहोनी होने को है । आंखें अब तक खुली थी तेरे इनतजार में अब मूँदने को है साँस थमने को है । छोड़ो मत ही आना तुम मैं रहूँगा नही सीने से अब जान निकलने को है | गर बचा हो आँखों में अश्क मेरे नाम का दो आँसू बहा देना अब जनाजा उठने को है ।