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छत पर गुज़ारी वो रात

तेरे साथ छत पे,

गुजारी वो रात कब गुजरी,

पता ही नहीं चला |

सितारों की बारात आयी,

कब रूखसत हुई ,

पता ही नहीं चला |

तू मुझमें खोयी ऐसी ,

मैं  तुझमें खोया ऐसा ,

कब सुबह हुई पता ही नहीं चला

 

वो रात भी क्या रात थी ,

जो गुजर के भी गुजरी नहीं ,

फकत उस रात के बाद ,

मैं सोया नहीं तू सोयी नहीं

ज़माने को इसका इल्म हुआ ,

पर  हमें  ना इसकी खबर  हुई ,

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