तेरे साथ छत पे,

गुजारी वो रात कब गुजरी,

पता ही नहीं चला |

सितारों की बारात आयी,

कब रूखसत हुई ,

पता ही नहीं चला |

तू मुझमें खोयी ऐसी ,

मैं  तुझमें खोया ऐसा ,

कब सुबह हुई पता ही नहीं चला

 

वो रात भी क्या रात थी ,

जो गुजर के भी गुजरी नहीं ,

फकत उस रात के बाद ,

मैं सोया नहीं तू सोयी नहीं

ज़माने को इसका इल्म हुआ ,

पर  हमें  ना इसकी खबर  हुई ,

 

वो रात आखिरी तुम्हारी हमारी थी ,

आसमा से बरसी चांदनी की ,

बरसात बड़ी सुहानी थी ,

हम एक दूसरे को देखते रहे ,

पर ना वो इश्क ना प्यार की खुमारी थी |

 

ना जाने फिर क्यूँ ,

आशिको सा हाल हुआ ,

मिलने को दिल बेहाल हुआ

आखिर आँखों ने आँखों से क्या कह दिया ,

कुछ पता ही नहीं चला |

 

तू मुझमें खोयी ऐसी ,

मैं  तुझमें खोया ऐसा ,

कब सुबह हुई पता ही नहीं चला