ऊँचे गगन को जब देखता जग है

छलांग लगाने को मचलता पग है


देखो सीखो इन चांद सितारों से

जिसने अंधेरा चीरा वो जगमग है


लगा दो जीवन खुशी की खोज में

अभी तो दौड़ते रक्त से भरा रग है


कृपया मुझे उदाहरण न दिखाए

ये मेरे स्वप्न सारे सब से अलग हैं


हे! मनुष्य तू किस से भाग रहा है

तेरा तो मन ही सब से बड़ा ठग है


-प्रियांशु सिंह