
सारे ज़ुल्म ज़माने के बताएँगे ज़माने को
लिखेंगे कराहती कविता सुनाएँगे ज़माने को
ले जाएंगे ज़माने को ख्यालों के उन राहों पे
टूटी राह सपनों की दिखाएँगे ज़माने को
खुशी नजर नहीं आती उम्मीदें गई वीरानों में
देकर दर्द भरे आंसू रुलाएँगे ज़माने को
हम तो हैं उनमे से जो
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