किसी को क्या परवाह के कोई जो न हो
आज रात होनी ही है, चाँद चाहे हो न हो
आज कल कम बातों का मकसद यही है
कि दर्द मेरा मुझतक ही रहे औरों को न हो
- प्रियांशु सिंह


किसी को क्या परवाह के कोई जो न हो
आज रात होनी ही है, चाँद चाहे हो न हो
आज कल कम बातों का मकसद यही है
कि दर्द मेरा मुझतक ही रहे औरों को न हो
- प्रियांशु सिंह