जिह्वा पे कृष्ण राम यहाँ जय श्रीकाशी धाम यहाँ

प्राणियों में सद्भाव यहाँ पे बजरंगबली भगवान हैं,


सीता कि सतित्व कहानी द्रौपदी ने जो निश्चय ठानी

शक्ति बल कि देवी माँ शारदे का सारा ज्ञान है,


महावीर का ज्ञान यहाँ पे गुरुवानी का गान यहाँ पे

परशुराम का क्रोध यहीं का यही के बुद्ध महान हैं,


इनको जिसने शरण दिया पाल पोष के बड़ा किया

उस जननी की जय बोलतें भारत माँ की सन्तान हैं।


- प्रियांशु सिंह