इश्क़ मोहब्बत प्रीत बेचारी

इस गर्दी में पिस गई सारी

एक हवस की मिली क्या गाड़ी

सब के सब बन गए सवारी


लो नाच रही बेढंग जवानी

समय की नाजुक अंग जवानी

एक पल में बचपन को छोड़े

एक पल में ही भंग जवानी


सूचना जन हित में जारी

सब के भीतर यही बीमारी

इन से जरा बच के रहियो

यहा खड़े है बड़े कलाकारी


किसीने धर्म सभ्यता न मानी

किसीने माँ बाप से जंग ठानी

सबपे इश्क़ का ठप्पा लगाके

बन जाती रोज नई कहानी