उसके मौत पर तराना लिखा जाएगा
कमाल का था फलाना लिखा जाएगा
बेखौफ होगी वो जब ज़द उर पे होगा
अजब सा था दीवाना लिखा जाएगा
उसके आस्था पे जब भी उठेगा सवाल
सच किसने कब है माना लिखा जाएगा
वैसे बातें तो बहुत उसमे खास थी पर
उसका गम को छुपाना लिखा जाएगा
सर सारे बुतों के शर्म से झुक जाएंगे
जब फूलो का मुरझाना लिखा जाएगा
जब लायक अफ़साना न दिखेगा कोई
तो झूटमूठ का फसाना लिखा जाएगा
अपनी कमियों को छुपाने के खातिर
है बड़ा जालिम ज़माना लिखा जाएगा
- प्रियांशु सिंह


