चुप तो अब रहा नही जाता
लेकिन कुछ कहा नही जाता
सब ने कहा जाने को जहाँ
मेरा मन वहाँ नही जाता
धीरे-धीरे सब छूटते जा रहे
ये अकेलापन सहा नही जाता
होंगे ये सारे के सारे लोग वहीं
कोई अवाज जहाँ नही जाता
कभी जो थी उम्मीद की हवा
उससे भी अब बहा नही जाता
रोज थोड़ा-थोड़ा मरते हैं, अब
तो ढंग से कराहा नही जाता
- प्रियांशु सिंह


