टप-टप कर गिरते आँसू
वेदना के फटे बादल से
वर्षो से बसती आँखो में
नहीं रहा जा रहा जल से
दुख से व्याकुल मन जब
ग्लानी से भरता जाता
रिस-रिस कर खारा पानी
नैनों की सतह पर आता
पोंछ कर खारे पानी को
पलकें हैं आँसू बनाती
कुहराम मचा है दिल में
वो तुमको यह बतलाती
-प्रियांशु सिंह


