लम्बे बाल बढ़ी दाढ़ी और हाथ में एक झोला झूलता रहता है
लोगों के हिसाब से उसका हुलिया कुछ ऐसा रहता है
न दुनिया की खबर है न अपनों का ख़याल
पर सबसे ज़्यादा संवेदनशील भी हर लम्हा वही रहता है
वो कहते हैं के उसका कोई भविष्य नहीं
पर भविष्य को हर पल वही जीता है
हाथों की रेखाओं को मिलाते मिलाते
वो आज को कल से कुछ जोड़ता है
हर एक धुंए के कश के साथ
वो मेरे समाज को भी झकझोरता है
चाहे वो मुस्कुराता है
पर अंदर ही अंदर सबसे ज़्यादा वो रोता है
सड़क पर चलता आदमी है वो
टपरी पर बैठा चाय का शौक़ीन भी
तेरे मुल्क का अफसानानिगार भी है वो
और मेरे देश का कहानीकार भी
चाहे मनमर्ज़ी का नाम सोचले
पर अब भी है बदनाम वही