कितना मुश्किल है तुम्हे भूल जाना
सालों की पड़ी आदत को छोड़ जाना
यादों को याद करके भी भुला जाना
और फिर इसी पल में वापस आ जाना
शायद उतना मुश्किल भी नहीं...
कितना मुश्किल है आंसू छुपा जाना
गालों पर पड़े उनके निशानों को मिटा जाना
हवाओं में तुम्हे महसूस कर जाना
और कुछ तेज़ी से कदम आगे बढ़ा जाना
शायद उतना मुश्किल भी नहीं.....
कितना मुश्किल है हुई गलतियों को सुधार जाना
तुम्हे सामने पाकर भी सामने से गुज़र जाना
अपने किये पुराने वादों को निभाते जाना
बेशक खुद थोड़ा दुखी होकर दुसरो को ख़ुशी दे जाना
शायद उतना मुश्किल भी नहीं...