रे बचपन रे बचपन लौट आ लौट आ हर कोई तुझे पुकार रहा ऐ मानव ऐ मानव ज़रा नज़र उठा मैं तेरे भीतर ही बसा जो तू यूँ धुंध की चादर ओढ़े रहा तो बाल रंग शाँति (सफेद) ही नज़र आएंगे ना है कि नहीं तू ही बता हम्म रे चिड़िया रे चिड़िया तू क्यों न कुक रही तनिक भर भोरे भोरे बचपन याद तो दिला जों तू मॉर्निंग वॉक पर न जा रहा तो मैं भी क्यों कुकू भला मास्क में चौंचवा न ओपेन हो रहा ऐ मानव ऐ मानव बालकन ने बुला वेरी बिजी आई एम फेबुक आतुर है खड़ा स्टेटस अपडेट को डूड प्लेइंग बुले व्हेल डेयर क्नो सब देख माँ धरती बोली जा मानव जी ले अपनी ज़िंदगी जिस रफ्तार से तू मुझे विनाश की और ले जा रहा तू भी कब रुक्सत हो जाए ये सत्य वचन बांध लें गाँठ समझदार को इशारा काफी