गणतंत्र का जो दिन था वो तारीख भी छब्बीस थी
अम्बेडकर की लेखनी सम्मान की प्रतिभूति थी
जारी हुआ उल्लेख जब भारत उदय फिर से हुआ
सब एक मत ,सब एक पथ ,निश्चय ये सर्वोपरि हुआ
अब साल सत्तर हो गए हैं , हम और पुष्पित हो गए हैं
इस विश्व के मानस पटल पर हम भी चित्रित हो गए हैं
यूँ कारवां बढ़ता रहेगा , हर देशवासी ये कहेगा
माँ भारती के कंठ से , उल्लास का ही स्वर उठेगा

