संकट भी उन पर आतें हैं
जो की उनसे लड़ पाते हैं
और तत्पर अपने ही पथ पर
जो आगे बढ़ते जाते हैं
जब घना अँधेरा छाता है
सूरज भी तब छुप जाता है
ना किरणों की वो चमक दमक
ना ही वो सुबह दूर तलक
फिर तभी कहीं कोई कोने में
एक छोटा तारा दीखता है
और धीरे धीरे नभ मंडल में
एक उजियारा दिखता है
अंधियारे में जगमग करता
है वो नन्हा सा ध्रुव तारा
जिसको न सकता कोई भेद
है ज्ञानी सर्वज्ञ नहीं अबोध
कठिनाई भी कुछ ऐसे ही
कुछ तारों को चमकाती है
जो अडिग रास्ते पे रहते
कुछ उनका न कर पाती है

