तुझे ताकते सुबह से शाम हो जाए, इसमें अब नया क्या है
तुझे ताकते जहान भूल जाऊ, इसमें अब नया क्या है
पर बहाने लोटने के अब, सोचूंगा नए हर बार
वरना रोज़ रुमाल भूल जाने में अब, नया क्या है।


तुझे ताकते सुबह से शाम हो जाए, इसमें अब नया क्या है
तुझे ताकते जहान भूल जाऊ, इसमें अब नया क्या है
पर बहाने लोटने के अब, सोचूंगा नए हर बार
वरना रोज़ रुमाल भूल जाने में अब, नया क्या है।