अबकी जब मिलने आना
संग अपने ढ़ेर सारा वक्त लाना
मैं भी मिलने जब आऊंगी
ढ़ेर सारी बातें लाऊंगी
उनमें भी सिर्फ तुम होगे
जानोगे तब जब समझोगे।
मैंने सोचा था इस बार,
मिलने की कवायद करोगे तुम,
पर इस बार भी वही हुआ
मिलने का पहल मैंने ही किया।
कितने उसूल के पक्के हैं
हम सिर्फ तुम्हारे चाहने पर मिलते हैं।
चार साल में सिर्फ चार बार
मिले हम ऐसे जैसे होली का त्योहार।
अब पांचवी बार मिलना है
बहुत कुछ कहना और बहुत कुछ सुनना है।
अपने मन को इस बार खोल देना
जो दबाये हो मन में सब बोल देना।
किसी बात का बुरा न मानूँगी
कम से कम इसी बहाने तुम्हें जानूँगी।
तुम्हारी तकलीफ में तुम्हारे साथ रहना चाहती हूँ
हाँ... बस इतना ही तो चाहती हूं।
ये शिकायत हमेशा रहती है मुझे
फिर भी कभी न कह पायी तुझे,
कितना कम बोलते हो मेरे सामने
ऐसे शांत तो नहीं रहते बाकी दोस्तों के सामने।
मेरी शिकायत को दूर कर देना,
इस बार जब मुझसे मिलना।
जानती हूँ सिर्फ दोस्त हूँ तुम्हारी
पर मेरी भी कुछ है जिम्मेदारी।
जब परेशान होती हूँ तुमसे सब कह डालती हूँ
पर हमेशा तुम्हे भी सुनना चाहती हूँ।
ढ़ेर सारा वक्त लेके आना
अबकी जब मिलने आना.......


