कितना बढ़िया होता ,
कि जस्ताबों को बयां करने को,
अल्फाज़ ना लगा करते।
करती हूं महसूस जो मैं ,
तुम भी किया करते।
क्या लुफ्त होता ,
इन तन्हाइयों में,
जो शोर दिलों के,
ख़ामोशी से सुना हम तुम करते।


कितना बढ़िया होता ,
कि जस्ताबों को बयां करने को,
अल्फाज़ ना लगा करते।
करती हूं महसूस जो मैं ,
तुम भी किया करते।
क्या लुफ्त होता ,
इन तन्हाइयों में,
जो शोर दिलों के,
ख़ामोशी से सुना हम तुम करते।