मोहब्बत तो हमको भी खुद से बड़ी ख़ास हैपर इन तन्हाइयों को इक कंधे की आस है,जो अकेलेपन में चला आए,बेज़ुबान ही सही, बस पास बैठ जाए,मैं रख दूँ सर उस पर,और बाजू उसकी भीग जाए।
मोहब्बत तो हमको भी खुद से बड़ी ख़ास हैपर इन तन्हाइयों को इक कंधे की आस है,
जो अकेलेपन में चला आए,बेज़ुबान ही सही, बस पास बैठ जाए,
मैं रख दूँ सर उस पर,और बाजू उसकी भीग जाए।