अल्फ़ाज़ हथियार बन जाते हैं जब लहज़े बदले जाते हैं,घाव कुछ ऐसे कर देते हैं जो ज़माने तक रह जाते हैं।और मुजरिम ख़ुद को दो टूक बोलकर निकल जाते हैं,फिर हम बैठकर उम्र भर उनका हिसाब लगाते हैं।
अल्फ़ाज़ हथियार बन जाते हैं जब लहज़े बदले जाते हैं,घाव कुछ ऐसे कर देते हैं जो ज़माने तक रह जाते हैं।
और मुजरिम ख़ुद को दो टूक बोलकर निकल जाते हैं,फिर हम बैठकर उम्र भर उनका हिसाब लगाते हैं।