मुझे डर नहीं लगता चार लोगों की बातों से,
मेरा दिल तो बस बैठ जाता है—
उन चार लोगों के चलते,
मेरे चार लोगों के बदले रवैये से।
पर फिर भी बाग़ी दिल बग़ावत करता है,
क्यूँकि ये कहीं न कहीं जानता है,
मेरे चार लोगों को भी मुझसे लगाव ख़ास है,
उनके मन में भी बस मेरी ख़ुशी की आस है,
बस उनका नादान दिल थोड़ा-सा डरता है।
और इस डर को मिटाने के लिए,
दिल का बाग़ी होना ज़रूरी है।
और बस यही ख़याल
मेरे दिल का डगमगाता हौसला सँभालता है,
और इसे फिर बग़ावत के लिए तैयार करता है।
