मैं एक ख़्वाब सा हूँ,
जो फिर एक बार आया हूँ-
अब न आऊँगा दुबारा लौट के-
मैं एक तूफान हूँ, दर्द हूँ-अज़ाब हूँ-
एक बार आने के बाद फिर न आने की बात-
एक बार आपस में दिल लगाने की बात-
एक झोका हूँ, समुंदर के लहर
जो एक बार जाने के बाद,
शायद ही कभी सोचता है आने के लिए-
रोकना हैं तो रोक लो,
इन मस्त वादियों में खोने से-
लहरों के बीच, विचलित मन-
अकेले हीं डूब जाने से-
बाँध लो अपने इस अनेपन कि डोर को-
जकड़ लो इस नेह की जंज़ीरों को-
शायद रुक जाऊँ मैं तेरे लिये-
बना लो मुझे अपनी बाजुओं में जकड़ के-
अपने गले में मेरा हार बनाके-
बस, ये ना हो कहने को कि-
काश! मैं ये-----
काश! मैं वो----
आज मेरे जाने के बाद-
तेरी है सुबह-ओ-शाम,
मेरी यादों में कटने वाली है-
बस ख़ुद को ये समझा लेना-
जहाँ भी रहूँगा मैं-
तेरी परछाईयाँ मेरे साये में रहेगी!
तेरी हर एक बात याद दिलाएगी,
जो दिन हमारे अपने थे-
जो एक दूसरे के लिए हमने चुराई थी-