कभी धूप से तपन ,

तो कभी छांव से भी शिकन होती है

यही जिंदगी है 

यहां कभी बेहिसाब खुशी ,

तो कभी बेमतलब ही आंखो में नमी होती है

कभी मुस्कान के पीछे कोई ग़म,

तो कभी नम आंखों के पीछे छिपी 

कोई खुशी होती है 

यहां सभी को छोटी–मोटी ,कोई तो कमी होती है

कभी खट्टी ,कभी मीठी, कभी बेस्वाद, 

जिंदगी इन जायको से भरी होती है

पूछ कर देखो कभी हाल किसी से ,

यहां हर किसी की लगी पड़ी होती है

तुम फिर भी हंसना, खिलखिलाना

दिल खोल कर मुस्कुराना

क्यूंकि हंसते रहने से हर मुश्किल आसान

और हर राह सरल होती है ।

    ~ प्रिया त्रिपाठी