*यू तो नज़रो के सामने रखी चीज़ भी नज़र नहीं आती मुझे ,
फिर क्यू तुम्हारा नाम हर जगह बिना ढुन्ढे ही मिल जाता है
*यू तो चंद मिनटो पहले कही बात भी भूल जाती हूँ मैं,
फिर क्यू तुम्हारी कहा हर शब्द हरदम मेरे कानो में गुंजता है
*यू तो ज़रा-सी बात पर भी तन जाती हैं ये भौंहे
फिर क्यू तुम्हें देखते ही दिल मुस्कुराने लगता है
*यू तो लोगों को अपनी कही हर बात दोहरानी पडती है मुझे,
फिर क्यू तुम्हारा मौन भी जैसे ये आंखे पढ लेती है
*यू तो कई चोट खाकर भी चुप रहती है ज़ुबा,
फिर क्यू तुम्हारी ज़रा-सी बेरुखी से आंखें नम हो जाती है
*यू तो हर रोज़ ही सफ़र करना आदत है मेरी,
फिर क्यू तुम तक पहुंचकर मन्ज़िल मिली ही लगती है.
