जब एक पुरुष का मन बेचैन हो या दिल आहत हुआ हो, 

वो जा सकता है कोई भी ट्रेन या बस पकड़ कर किसी दूर कोने में, 

निकल सकता है रातों को सुनसान सड़को पर खुद को तलाशने,

पर एक स्त्री सिर्फ़ चादर में मुंह छिपाकर रो सकती है, 

उसे हक़ नहीं बाहर जाकर कुछ खोजने का.


जब एक पुरुष असमंजस में हो, चीज़ो को और जानना समझना चाहता हो 

मिल सकते हैं उसे कई अवसर, क्योंकि उसकी उम्र कभी ज्यादा नहीं होती,

पर स्त्रियों की उम्र शायद हर साल दुगुनी गति से बढ़ती है. 


पुरुष के सैंकड़ों गलतियां कर एक सही काम करने पर, 

पड़ जाता है परदा पिछली बातों पर, 

पर स्त्री के हजारों सही काम कर एक तथाकथित गलती करने पर, 

ढक जाते हैं उसके सारे गुण!