Naari ki vyatha's image

आखिर मै भी तो किसी की बेटी थी,

तो क्यों न मुझे सम्मान दिया,,

क्या मुझसे पाप हुआ कोई,

या वधु होने का उपहार दिया,,

जब किया नहीं मैंने कुछ भी,

क्यों इतना बड़ा अन्याय हुआ,,

क्या यही था मेरी किस्मत में,

जो यूं विश्वास घात किया,,

क्यों जला दिया मुझको ऐसे,

क्यों इतना भी नहीं तरस किया,,

मैं भी तो किसी की बेटी थी,

मुझको भी किसी ने जनम दिया,,

अपने हृदय के टुकड़े को ,

स-सम्मान विदा भी किया,,

पैसों के इतने लोभी थे तुम,

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